पलाश का पौधा: प्रकृति का अद्भुत उपहार"
तो हेलो दोस्तों कैसे आप सभी..
उम्मीद करता हूं आप काफी अच्छे होंगे..
आज मॉर्निंग वॉक करते हुए मैं आपको एक ऐसे अद्भुत पेड़ से परिचित कराने जा रहे हैं, जो न केवल सुंदर है बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर है। यह है पलाश का पेड़, जिसे 'टेसू का फूल' या 'ढाक' के नाम से भी जाना जाता है..
हमारे यहां क्षेत्रीय भाषा में इसे खाकरा के पत्तों के नाम से जाना जाता है..
इसके पत्तों का जो आकार है वह पतंग की तरह होता है और इसके पत्तों पर थोड़े बहुत रवे होते हैं, जो छूने पर एक सूती कपड़े की फीलिंग देते हैं..
पलाश को उसके आकर्षक फूलों के कारण "जंगल की आग" भी कहा जाता है..
पलाश के फूल बसंत ऋतु में खिलते हैं और इसके फूलों में प्राकृतिक रंग होने की वजह से फाल्गुन मास मे होली के त्योहार में इस्तेमाल होने वाली अबीर की गुलाल को भी इसी से तैयार किया जाता है। पलाश के फूल दिखने में बेहद ही खूबसूरत होते हैं जैसा कि आप वीडियो में देख पा रहे हैं..
वैसे तो पलाश बहुत ही आयुर्वेदिक महत्व लिए हुए होता है..
खासकर राजस्थान में इसके पत्तों से बने हुए दोने और पत्तल में भोजन परोसा जाता है. जिसका स्वाद वाकई लाजवाब होता है जो स्वाद के साथ-साथ शरीर में एंटीऑक्सीडेंट तत्वों को बड़ा कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ता है और शरीर को स्वस्थ रखता है..
हमारे यहां तो आप गरम-गरम पकौड़ों का आनंद इसके दौने में ले सकते हैं जो चटनी के साथ-साथ इसकी सोंधी सोंधी खुशबू एक अलग ही स्वाद का अनुभव देता है..
मुझे तो इसके पत्तों में बने हुए ढोकले काफी पसंद आते हैं..
अक्सर सर्दियों के दिनों में बने मकई के ढोकले मेरी माता जी इसी के पत्तों पर भांपती है जिसकी खुशबू वाकई लाजवाब होती है..
"पलाश मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।
लाल पलाश**: यह सबसे आम प्रकार है, जिसके फूल गहरे लाल या नारंगी रंग के होते हैं। यह वसंत ऋतु में खिलता है और इसकी पत्तियां हरी होती हैं।
पीला पलाश**: यह कम पाया जाने वाला प्रकार है, जिसके फूल पीले रंग के होते हैं। यह दुर्लभ है और इसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
सफेद पलाश**: यह सबसे दुर्लभ प्रकार है, जिसके फूल सफेद रंग के होते हैं। यह बहुत ही कम देखने को मिलता है और इसकी खासियत इसके सफेद फूल हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पलाश का काफी महत्व होता है खासकर सफेद पलाश के पौधे का उपयोग तंत्र साधना और घर में सकारात्मक वातावरण बनाये रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है क्योकि ऐसी मान्यता है की सफेद पलाश के फूल, पत्ते और छाल भगवान शंकर को प्रिय होते हैं..
"पलाश केवल सुंदर ही नहीं है, बल्कि इसके कई औषधीय फायदे भी हैं। इसकी छाल, पत्तियां और फूलों का उपयोग आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। यह त्वचा रोग, पाचन समस्याओं और सूजन को कम करने में मददगार है।"
"पलाश का पेड़ न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है और वन्यजीवों के लिए आश्रय प्रदान करता है।"
"तो यह था पलाश का पौधा, जो कि प्रकृति का एक अद्भुत उपहार है।
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